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mahabharat 14.29.15: उनके भय से उन्होंने क्षत्रिय धर्म भी त्याग दिया और बहुत समय तक ब्राह्मणों का दर्शन न कर पाने के कारण धीरे-धीरे अपने धर्म भूलकर शूद्र बन गए॥15॥   |   mahabharat अध्याय 14.29: परशुरामजीके द्वारा क्षत्रिय-कुलका संहार   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 29: परशुरामजीके द्वारा क्षत्रिय-कुलका संहार  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  14.29.15 
तेषां स्वविहितं कर्म तद्भयान्नानुतिष्ठताम्।
प्रजा वृषलतां प्राप्ता ब्राह्मणानामदर्शनात्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उनके भय से उन्होंने क्षत्रिय धर्म भी त्याग दिया और बहुत समय तक ब्राह्मणों का दर्शन न कर पाने के कारण धीरे-धीरे अपने धर्म भूलकर शूद्र बन गए॥15॥
 
Out of fear of them, they even abandoned their Kshatriya duties. As they could not see Brahmins for a long time, they gradually forgot their duties and became Shudras.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)