श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 28: ज्ञानी पुरुषकी स्थिति तथा अध्वर्यु और यतिका संवाद*  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  14.28.27 
ब्राह्मण उवाच
उपपत्त्या यतिस्तूष्णीं वर्तमानस्तत: परम्।
अध्वर्युरपि निर्मोह: प्रचचार महामखे॥ २७॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण कहते हैं- हे प्रिये! अध्वर्यु के उपदेश से वह ऋषि चुप हो गए और कुछ भी नहीं बोले। तब अध्वर्यु भी आसक्ति रहित होकर उस महायज्ञ की ओर चल पड़े॥ 27॥
 
The Brahmin says- Dear! Due to the advice given by Adhvaryu, that sage became quiet and did not speak anything. Then Adhvaryu also became free from attachment and proceeded towards that great sacrifice.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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