Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.26.9-10: फिर जब उन्होंने उस उपदेश के अर्थ पर विचार किया, तब सबसे पहले सर्पों को दूसरों के द्वारा काटे जाने का भाव उत्पन्न हुआ, दैत्यों को स्वाभाविक अभिमान उत्पन्न हुआ, देवताओं ने दान को अपनाने का और महर्षियों ने विनम्रता को अपनाने का निश्चय किया॥9-10॥ | mahabharat अध्याय 14.26: अन्तर्यामीकी प्रधानता । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
फिर जब उन्होंने उस उपदेश के अर्थ पर विचार किया, तब सबसे पहले सर्पों को दूसरों के द्वारा काटे जाने का भाव उत्पन्न हुआ, दैत्यों को स्वाभाविक अभिमान उत्पन्न हुआ, देवताओं ने दान को अपनाने का और महर्षियों ने विनम्रता को अपनाने का निश्चय किया॥9-10॥
Then when they pondered over the meaning of that advice, first of all the snakes got the feeling of being bitten by others, the demons got aroused with their natural pride, the Gods decided to adopt charity and the great sages decided to adopt humility.॥ 9-10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥