Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.26.5: शत्रु तो एक ही है, दूसरा कोई नहीं। मैं हृदय में निवास करने वाले परमात्मा को अपना गुरु कह रहा हूँ। उसी गुरु की प्रेरणा से संसार के सभी सर्प सदैव द्वेष से भरे रहते हैं॥5॥ | mahabharat अध्याय 14.26: अन्तर्यामीकी प्रधानता । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एको द्वेष्टा नास्ति ततो द्वितीयो
यो हृच्छयस्तमहमनुब्रवीमि।
तेनानुशिष्टा गुरुणा सदैव
लोके द्विष्टा: पन्नगा: सर्व एव॥ ५॥
अनुवाद
शत्रु तो एक ही है, दूसरा कोई नहीं। मैं हृदय में निवास करने वाले परमात्मा को अपना गुरु कह रहा हूँ। उसी गुरु की प्रेरणा से संसार के सभी सर्प सदैव द्वेष से भरे रहते हैं॥5॥
There is only one enemy and no other. I am calling the Supreme Soul who resides in the heart as my Guru. Due to the inspiration of that Guru, all the snakes in the world are always filled with hatred. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥