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mahabharat 14.26.3: एक ही भाई है, उसके अतिरिक्त कोई दूसरा भाई नहीं है। जो परमेश्वर हृदय में स्थित है, उसी को मैं अपना मित्र कहता हूँ। उसके उपदेश से सगे-संबंधी मित्र बन जाते हैं और सप्तर्षि आकाश में प्रकाशित हो जाते हैं। 3॥   |   mahabharat अध्याय 14.26: अन्तर्यामीकी प्रधानता   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 26: अन्तर्यामीकी प्रधानता  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  14.26.3 
एको बन्धुर्नास्ति ततो द्वितीयो
यो हृच्छयस्तमहमनुब्रवीमि।
तेनानुशिष्टा बान्धवा बन्धुमन्त:
सप्तर्षयश्चैव दिवि प्रभान्ति॥ ३॥
 
 
अनुवाद
एक ही भाई है, उसके अतिरिक्त कोई दूसरा भाई नहीं है। जो परमेश्वर हृदय में स्थित है, उसी को मैं अपना मित्र कहता हूँ। उसके उपदेश से सगे-संबंधी मित्र बन जाते हैं और सप्तर्षि आकाश में प्रकाशित हो जाते हैं। 3॥
 
There is only one brother, there is no other brother other than him. I call only that God who is present in the heart as my friend. By his teachings, relatives become friends and the seven sages are illuminated in the sky. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)