Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.26.2: गुरु तो एक ही है, दूसरा कोई नहीं। मैं हृदय में निवास करने वाले उस परम पुरुष को अपना गुरु कहता हूँ। उस गुरु की साधना से सभी राक्षस पराजित हो गए हैं॥ 2॥ | mahabharat अध्याय 14.26: अन्तर्यामीकी प्रधानता । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एको गुरुर्नास्ति ततो द्वितीयो
यो हृच्छयस्तमहमनुब्रवीमि।
तेनानुशिष्टा गुरुणा सदैव
पराभूता दानवा: सर्व एव॥ २॥
अनुवाद
गुरु तो एक ही है, दूसरा कोई नहीं। मैं हृदय में निवास करने वाले उस परम पुरुष को अपना गुरु कहता हूँ। उस गुरु की साधना से सभी राक्षस पराजित हो गए हैं॥ 2॥
There is only one Guru and no other. I am calling the Supreme Being who resides in the heart as my Guru. All the demons have been defeated by the discipline of that Guru.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥