Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.26.15: इसी प्रकार जो मनुष्य कामनाओं के द्वारा विषय-भोगों में लिप्त रहता है, वह सदैव दास ही रहता है और जो मनुष्य अपनी इन्द्रियों को वश में रखने में लगा रहता है, वह सदैव ब्रह्मचारी ही रहता है ॥15॥ | mahabharat अध्याय 14.26: अन्तर्यामीकी प्रधानता । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसी प्रकार जो मनुष्य कामनाओं के द्वारा विषय-भोगों में लिप्त रहता है, वह सदैव दास ही रहता है और जो मनुष्य अपनी इन्द्रियों को वश में रखने में लगा रहता है, वह सदैव ब्रह्मचारी ही रहता है ॥15॥
Similarly, a man who indulges in sensual pleasures through desires is always a servant and a man who is engaged in controlling his senses is always a celibate. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥