एकं शास्तारमासाद्य शब्देनैकेन संस्कृता:।
नाना व्यवसिता: सर्वे सर्पदेवर्षिदानवा:॥ ११॥
अनुवाद
इस प्रकार सर्प, देवता, ऋषि और राक्षस - ये सभी एक ही गुरु के पास गए और एक ही वचनों के उपदेश से उनकी बुद्धि परिष्कृत हो गई, फिर भी उनके मन में भिन्न-भिन्न प्रकार के विचार उत्पन्न हुए ॥11॥
In this manner the serpent, the god, the sage and the demon - all of them went to the same teacher and their intellect was refined by the teachings of the same words, but yet different kinds of thoughts arose in their minds. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥