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mahabharat 14.25.10: वह अभक्ष्यभक्षण और मदिरापान जैसे दुर्गुणों को भी अपनाता है, जो उसके लिए घातक हैं। अन्न को खाकर वह उसे मारता है और उसे मारकर स्वयं भी उसी से मारा जाता है॥10॥   |   mahabharat अध्याय 14.25: चातुर्होम यज्ञका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 25: चातुर्होम यज्ञका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  14.25.10 
अभक्ष्यभक्षणं चैव मद्यपानं च हन्ति तम्।
स चान्नं हन्ति तं चान्नं स हत्वा हन्यते पुन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वह अभक्ष्यभक्षण और मदिरापान जैसे दुर्गुणों को भी अपनाता है, जो उसके लिए घातक हैं। अन्न को खाकर वह उसे मारता है और उसे मारकर स्वयं भी उसी से मारा जाता है॥10॥
 
He also adopts vices like eating inedibles and drinking alcohol, which are fatal for him. By eating food he kills it and by killing it he himself is also killed by it.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)