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mahabharat 14.24.8: प्रवृत्ति की मूल इच्छा से वीर्य उत्पन्न होता है। उसी से रजस्वला रक्त उत्पन्न होता है। वीर्य और रजस्वला रक्त दोनों समान हैं और व्यान से उत्पन्न होते हैं। इसलिए इन्हें सामान्य कहा जाता है ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 14.24: देवर्षि नारद और देवमतका संवाद एवं उदानके उत्कृष्ट रूपका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 24: देवर्षि नारद और देवमतका संवाद एवं उदानके उत्कृष्ट रूपका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  14.24.8 
कामात् संजायते शुक्रं शुक्रात् संजायते रज:।
समानव्यानजनिते सामान्ये शुक्रशोणिते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
प्रवृत्ति की मूल इच्छा से वीर्य उत्पन्न होता है। उसी से रजस्वला रक्त उत्पन्न होता है। वीर्य और रजस्वला रक्त दोनों समान हैं और व्यान से उत्पन्न होते हैं। इसलिए इन्हें सामान्य कहा जाता है ॥8॥
 
Semen is produced from the basic desire of the tendency. From that, menstrual blood is produced. Both semen and menstrual blood are similar and are produced from the vyana. Therefore, they are called normal. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)