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mahabharat 14.24.6: वीर्य से पहले प्राणशक्ति मासिक धर्म के रक्त के साथ मिलकर उसमें कार्य करना शुरू कर देती है। जब वीर्य उस प्राणशक्ति से दूषित हो जाता है, तब अपान की प्रवृत्ति शुरू हो जाती है। 6.   |   mahabharat अध्याय 14.24: देवर्षि नारद और देवमतका संवाद एवं उदानके उत्कृष्ट रूपका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 24: देवर्षि नारद और देवमतका संवाद एवं उदानके उत्कृष्ट रूपका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  14.24.6 
शुक्राच्छोणितसंसृष्टात् पूर्वं प्राण: प्रवर्तते।
प्राणेन विकृते शुक्रे ततोऽपान: प्रवर्तते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वीर्य से पहले प्राणशक्ति मासिक धर्म के रक्त के साथ मिलकर उसमें कार्य करना शुरू कर देती है। जब वीर्य उस प्राणशक्ति से दूषित हो जाता है, तब अपान की प्रवृत्ति शुरू हो जाती है। 6.
 
The life force comes before the semen mixed with the menstrual blood and starts functioning in it. When the semen gets contaminated by that life force, then the tendency of apana starts. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)