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mahabharat 14.24.11: उस अग्नि का धुआँ रजोगुण से युक्त है और राख रजोगुण से युक्त है। जिसके निमित्त हविष्य यज्ञ किया जाता है, उस अग्नि से (प्रकाशस्वरूप परमेश्वर से) यह सम्पूर्ण जगत उत्पन्न होता है। 11॥   |   mahabharat अध्याय 14.24: देवर्षि नारद और देवमतका संवाद एवं उदानके उत्कृष्ट रूपका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 24: देवर्षि नारद और देवमतका संवाद एवं उदानके उत्कृष्ट रूपका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  14.24.11 
तस्य धूमस्तमो रूपं रजो भस्मसु तेजस:।
सर्वं संजायते तस्य यत्र प्रक्षिप्यते हवि:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उस अग्नि का धुआँ रजोगुण से युक्त है और राख रजोगुण से युक्त है। जिसके निमित्त हविष्य यज्ञ किया जाता है, उस अग्नि से (प्रकाशस्वरूप परमेश्वर से) यह सम्पूर्ण जगत उत्पन्न होता है। 11॥
 
The smoke of that fire is full of passion and the ashes are full of passion. For whose sake the Havishya sacrifice is made, this entire world is born from that fire (from God in the form of light). 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)