Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.21.9: उससे वाचस्पति (वेद वाणी) प्रकट होते हैं। मन उन्हें देखता है। मन के बाद एक रूप प्रकट होता है, जो नीले, पीले आदि रंगों से रहित है। वह रूप मन की ओर दौड़ता है॥9॥ | mahabharat अध्याय 14.21: दस होताओंसे सम्पन्न होनेवाले यज्ञका वर्णन तथा मन और वाणीकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उससे वाचस्पति (वेद वाणी) प्रकट होते हैं। मन उन्हें देखता है। मन के बाद एक रूप प्रकट होता है, जो नीले, पीले आदि रंगों से रहित है। वह रूप मन की ओर दौड़ता है॥9॥
From that, Vachaspati (Veda Vaani)-appears. The mind sees it. After the mind, a form appears, which is devoid of colours like blue, yellow etc. That form runs towards the mind.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥