श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 21: दस होताओंसे सम्पन्न होनेवाले यज्ञका वर्णन तथा मन और वाणीकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  14.21.4 
दिशो वायू रविश्चन्द्र: पृथ्व्यग्नी विष्णुरेव च।
इन्द्र: प्रजापतिर्मित्रमग्नयो दश भामिनि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भामिनी! दिशा, वायु, सूर्य, चंद्रमा, पृथ्वी, अग्नि, विष्णु, इंद्र, प्रजापति और मित्र - ये दस देवता अग्नि हैं। 4॥
 
Bhamini! Disha, Vayu, Sun, Moon, Earth, Agni, Vishnu, Indra, Prajapati and Mitra – these ten gods are Agni. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)