श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 21: दस होताओंसे सम्पन्न होनेवाले यज्ञका वर्णन तथा मन और वाणीकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  14.21.24 
ब्राह्मण्युवाच
अनुत्पन्नेषु वाक्येषु चोद्यमाना विवक्षया।
किन्नु पूर्वं तदा देवी व्याजहार सरस्वती॥ २४॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणी ने पूछा - हे प्रभु! जब वाक्य अभी तक नहीं बने थे, तब कुछ कहने की इच्छा से प्रेरित होकर देवी सरस्वती ने पहले क्या कहा?॥ 24॥
 
The Brahmin lady asked - Lord! When the sentences were not produced yet, what did Goddess Saraswati, inspired by the desire to say something, say first?॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)