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mahabharat 14.21.2: भामिनी! कान, त्वचा, नेत्र, जिह्वा (वाणी और स्राव), नासिका, हाथ, पैर, योनि और गुदा- ये दस हैं॥2॥   |   mahabharat अध्याय 14.21: दस होताओंसे सम्पन्न होनेवाले यज्ञका वर्णन तथा मन और वाणीकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 21: दस होताओंसे सम्पन्न होनेवाले यज्ञका वर्णन तथा मन और वाणीकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  14.21.2 
श्रोत्रं त्वक् चक्षुषी जिह्वा नासिका चरणौ करौ।
उपस्थं वायुरिति वा होतॄणि दश भामिनि॥ २॥
 
 
अनुवाद
भामिनी! कान, त्वचा, नेत्र, जिह्वा (वाणी और स्राव), नासिका, हाथ, पैर, योनि और गुदा- ये दस हैं॥2॥
 
Bhamini! Ears, skin, eyes, tongue (speech and secretion), nostrils, hands, feet, vagina and anus - these are ten. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)