श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 21: दस होताओंसे सम्पन्न होनेवाले यज्ञका वर्णन तथा मन और वाणीकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  14.21.19 
प्राणापानान्तरे देवी वाग् वै नित्यं स्म तिष्ठति।
प्रेर्यमाणा महाभागे विना प्राणमपानती।
प्रजापतिमुपाधावत् प्रसीद भगवन्निति॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे महात्मन्! देवी सरस्वती सदैव प्राण और अपान के मध्य निवास करती हैं। जब वे प्राण की सहायता के बिना निम्नतम अवस्था को पहुँचने लगीं, तो वे दौड़कर प्रजापति के पास गईं और बोलीं, 'प्रभु! आप प्रसन्न हों।'
 
O great one! Goddess Saraswati always resides between Prana and Apan. When she started reaching the lowest state without the help of Prana, she ran to Prajapati and said, 'Lord! Please be pleased.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)