Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.21.15: तब भगवान आत्मदेव ने कहा, ‘मन ही सर्वश्रेष्ठ है।’ यह सुनकर सरस्वती बोलीं, ‘मैं कामधेनु बनकर तुम्हें सब कुछ दूँगी।’ इस प्रकार वाणी ने स्वयं ही अपनी श्रेष्ठता प्रकट कर दी॥15॥ | mahabharat अध्याय 14.21: दस होताओंसे सम्पन्न होनेवाले यज्ञका वर्णन तथा मन और वाणीकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब भगवान आत्मदेव ने कहा, ‘मन ही सर्वश्रेष्ठ है।’ यह सुनकर सरस्वती बोलीं, ‘मैं कामधेनु बनकर तुम्हें सब कुछ दूँगी।’ इस प्रकार वाणी ने स्वयं ही अपनी श्रेष्ठता प्रकट कर दी॥15॥
Then Lord Atmadev said, 'The mind is the best.' Hearing this, Saraswati said, 'I will become Kamadhenu and give you everything.' In this way, speech itself revealed its superiority.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥