श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 21: दस होताओंसे सम्पन्न होनेवाले यज्ञका वर्णन तथा मन और वाणीकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  14.21.13 
प्रश्नं तु वाङ्मनसोर्मां यस्मात् त् वमनुपृच्छसि।
तस्मात् ते वर्तयिष्यामि तयोरेव समाह्वयम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
परन्तु चूँकि तुम मुझसे केवल वाणी और मन के विषय में ही पूछ रहे हो, इसलिए मैं तुम्हें उन दोनों के बीच का वार्तालाप बताता हूँ ॥13॥
 
But since you ask me only about speech and mind, I will tell you the conversation between the two. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)