श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 21: दस होताओंसे सम्पन्न होनेवाले यज्ञका वर्णन तथा मन और वाणीकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  14.21.1 
ब्राह्मण उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
निबोध दशहोतॄणां विधानमथ यादृशम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण कहता है, 'प्रिय! विद्वान पुरुष इस विषय में इस प्राचीन इतिहास का उदाहरण देते हैं। दस होता मिलकर जिस प्रकार यज्ञ करते हैं, उसे सुनो।'
 
The Brahmin says, 'Dear! Learned men give the example of this ancient history in this matter. Listen to the way ten Hotas together perform the Yagna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)