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mahabharat 14.20.7: परन्तु जिन्हें ज्ञान प्राप्त नहीं हुआ है, वे कर्मों द्वारा केवल आसक्ति का संचय करते हैं। इस संसार में दो क्षण भी बिना कर्म किए रहना किसी के लिए संभव नहीं है।॥7॥   |   mahabharat अध्याय 14.20: ब्राह्मणगीता—एक ब्राह्मणका अपनी पत्नीसे ज्ञानयज्ञका उपदेश करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 20: ब्राह्मणगीता—एक ब्राह्मणका अपनी पत्नीसे ज्ञानयज्ञका उपदेश करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  14.20.7 
मोहमेव नियच्छन्ति कर्मणा ज्ञानवर्जिता:।
नैष्कर्म्यं न च लोकेऽस्मिन् मुहूर्तमपि लभ्यते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
परन्तु जिन्हें ज्ञान प्राप्त नहीं हुआ है, वे कर्मों द्वारा केवल आसक्ति का संचय करते हैं। इस संसार में दो क्षण भी बिना कर्म किए रहना किसी के लिए संभव नहीं है।॥7॥
 
‘But those who have not attained knowledge, they only accumulate attachment through actions. It is not possible for anyone to live without doing any action for even two moments in this world.॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)