Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.20.6: ‘जो दीक्षाएँ, व्रत आदि इस लोक में मान्य हैं तथा जो भौतिक कर्म इन आँखों से दिखाई देते हैं, वे ही वास्तव में कर्म माने जाते हैं। ऐसे कर्मों को ही कर्म कहते हैं।॥6॥ | mahabharat अध्याय 14.20: ब्राह्मणगीता—एक ब्राह्मणका अपनी पत्नीसे ज्ञानयज्ञका उपदेश करना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ग्राह्यं दृश्यं च सत्यं वा यदिदं कर्म विद्यते।
एतदेव व्यवस्यन्ति कर्म कर्मेति कर्मिण:॥ ६॥
अनुवाद
‘जो दीक्षाएँ, व्रत आदि इस लोक में मान्य हैं तथा जो भौतिक कर्म इन आँखों से दिखाई देते हैं, वे ही वास्तव में कर्म माने जाते हैं। ऐसे कर्मों को ही कर्म कहते हैं।॥6॥
‘The initiations and vows etc. which are acceptable in this world and the physical actions which are visible to these eyes are actually considered as karma. The diligent people call such actions as karma.॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥