Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.20.5: अपनी पत्नी की यह बात सुनकर शान्तचित्त ब्राह्मणदेवता मुस्कुराये और बोले, 'हे सौभाग्यवती स्त्राी! तुम सदैव पापों से दूर रहती हो, इसलिए मुझे तुम्हारी बात बुरी नहीं लगती। | mahabharat अध्याय 14.20: ब्राह्मणगीता—एक ब्राह्मणका अपनी पत्नीसे ज्ञानयज्ञका उपदेश करना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवमुक्त: स शान्तात्मा तामुवाच हसन्निव।
सुभगे नाभ्यसूयामि वाक्यस्यास्य तवानघे॥ ५॥
अनुवाद
अपनी पत्नी की यह बात सुनकर शान्तचित्त ब्राह्मणदेवता मुस्कुराये और बोले, 'हे सौभाग्यवती स्त्राी! तुम सदैव पापों से दूर रहती हो, इसलिए मुझे तुम्हारी बात बुरी नहीं लगती।
On hearing his wife say this, the calm-minded Brahmin god smiled and said, 'Fortunate lady! You always stay away from sins; therefore I do not feel bad about your statement.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥