श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 2: श्रीकृष्ण और व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  14.2.5 
श्रुताश्च राजधर्मास्ते भीष्माद् भागीरथीसुतात्।
कृष्णद्वैपायनाच्चैव नारदाद् विदुरात् तथा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
‘तुमने गंगानन्दन भीष्म से राजधर्मों का वर्णन सुना है। श्री कृष्णद्वैपायन व्यास, देवर्षि नारद और विदुरजी से कर्तव्य का उपदेश सुना है।’॥5॥
 
‘You have heard the description of royal religions from Ganganandan Bhishma. Have heard the teachings of duty from Shri Krishnadvaipayan Vyas, Devarshi Narad and Vidurji. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)