श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 2: श्रीकृष्ण और व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  14.2.17 
तथाप्रवृत्तो नृपतिर्नाधिबन्धेन युज्यसे।
मोक्षधर्माश्च निखिला याथातथ्येन ते श्रुता:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
‘उनके अनुसार आचरण करनेवाला राजा कभी मानसिक चिन्ता से ग्रस्त नहीं होता।’ तुमने मोक्ष का सम्पूर्ण मार्ग भी यथार्थ रूप में सुना है॥17॥
 
‘A king who behaves according to them is never troubled by mental anxiety. You have also heard the complete path of salvation in its true form.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)