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श्री महाभारत
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पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
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अध्याय 19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन
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श्लोक 4
श्लोक
14.19.4
जीवितं मरणं चोभे सुखदु:खे तथैव च।
लाभालाभे प्रियद्वेष्ये य: सम: स च मुच्यते॥ ४॥
अनुवाद
जो मनुष्य जीवन-मरण, सुख-दुःख, लाभ-हानि, राग-द्वेष आदि द्वन्द्वों को समभाव से देखता है, वह मुक्त हो जाता है ॥4॥
One who looks at the conflicts of life-death, happiness-sorrow, profit-loss, love-dislike etc. with equanimity becomes free. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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