Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.19.39: यह खाया हुआ अन्न बार-बार जठर में पहुँचकर किस प्रकार पचता है? इसका रस किस प्रकार बनता है और यह रक्त में किस प्रकार परिवर्तित होता है?॥39॥ | mahabharat अध्याय 14.19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भुक्तं भुक्तमिदं कोष्ठे कथमन्नं विपच्यते।
कथं रसत्वं व्रजति शोणितत्वं कथं पुन:॥ ३९॥
अनुवाद
यह खाया हुआ अन्न बार-बार जठर में पहुँचकर किस प्रकार पचता है? इसका रस किस प्रकार बनता है और यह रक्त में किस प्रकार परिवर्तित होता है?॥39॥
‘How does this food eaten repeatedly reach the stomach and get digested? How does its juice get formed and how does it get transformed into blood?॥ 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥