Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.19.32: जब योगी पूर्णरूपेण योगाभ्यास करके अपने भीतर आत्मा का साक्षात्कार करने लगता है, तब वह स्वयं इन्द्रपद भी प्राप्त करने की इच्छा नहीं रखता ॥32॥ | mahabharat अध्याय 14.19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सम्यग्युक्तो यदाऽऽत्मानमात्मन्येव प्रपश्यति।
तदैव न स्पृहयते साक्षादपि शतक्रतो:॥ ३२॥
अनुवाद
जब योगी पूर्णरूपेण योगाभ्यास करके अपने भीतर आत्मा का साक्षात्कार करने लगता है, तब वह स्वयं इन्द्रपद भी प्राप्त करने की इच्छा नहीं रखता ॥32॥
When a yogi, after practising Yoga thoroughly, begins to realise the Self within himself, then he does not even wish to attain the position of Indra himself. ॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥