Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.19.25: वह योगी अपनी इच्छानुसार नाना प्रकार के शरीर धारण कर सकता है, वह बुढ़ापे और मृत्यु को भी दूर भगा सकता है, वह न तो शोक करता है और न ही प्रसन्न होता है। 25. | mahabharat अध्याय 14.19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अन्यान्याश्चैव तनवो यथेष्टं प्रतिपद्यते।
विनिवृत्य जरां मृत्युं न शोचति न हृष्यति॥ २५॥
अनुवाद
वह योगी अपनी इच्छानुसार नाना प्रकार के शरीर धारण कर सकता है, वह बुढ़ापे और मृत्यु को भी दूर भगा सकता है, वह न तो शोक करता है और न ही प्रसन्न होता है। 25.
That Yogi can take different types of bodies according to his wishes, he can even drive away old age and death, he neither grieves nor rejoices. 25.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥