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mahabharat 14.18.9: जैसे तपा हुआ लोहा जिस साँचे में ढाला जाता है, उसी का रूप धारण कर लेता है, वैसे ही जीवात्मा गर्भ में प्रवेश करता है, ऐसा समझो (अर्थात् जीवात्मा का शरीर जिस गर्भ में प्रवेश करता है, उसी का रूप धारण कर लेता है)।॥9॥   |   mahabharat अध्याय 14.18: जीवके गर्भ-प्रवेश,आचार-धर्म, कर्म-फलकी अनिवार्यता तथा संसारसे तरनेके उपायका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.18.9 
यथा लोहस्य नि:स्यन्दो निषिक्तो बिम्बविग्रहम्।
उपैति तद् विजानीहि गर्भे जीवप्रवेशनम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जैसे तपा हुआ लोहा जिस साँचे में ढाला जाता है, उसी का रूप धारण कर लेता है, वैसे ही जीवात्मा गर्भ में प्रवेश करता है, ऐसा समझो (अर्थात् जीवात्मा का शरीर जिस गर्भ में प्रवेश करता है, उसी का रूप धारण कर लेता है)।॥9॥
 
Just as the liquid of heated iron takes the shape of the mould in which it is cast, in the same manner a soul enters the womb, understand this (i.e. the body of a soul takes the form of the womb in which it enters).॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)