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mahabharat 14.18.6: आत्मा अपनी इच्छा से उस शरीर में प्रवेश करके सूक्ष्म और अव्यक्त होने के कारण किसी भी वस्तु में आसक्त नहीं होती; क्योंकि वास्तव में वह सनातन परब्रह्म है॥6॥   |   mahabharat अध्याय 14.18: जीवके गर्भ-प्रवेश,आचार-धर्म, कर्म-फलकी अनिवार्यता तथा संसारसे तरनेके उपायका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.18.6 
सौक्ष्म्यादव्यक्तभावाच्च न च क्वचन सज्जति।
सम्प्राप्य ब्राह्मण: कामं तस्मात् तद् ब्रह्म शाश्वतम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
आत्मा अपनी इच्छा से उस शरीर में प्रवेश करके सूक्ष्म और अव्यक्त होने के कारण किसी भी वस्तु में आसक्त नहीं होती; क्योंकि वास्तव में वह सनातन परब्रह्म है॥6॥
 
The soul, having entered that body according to its will, is not attached to anything due to being subtle and unmanifest; because in reality it is the eternal Supreme Being.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)