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सौक्ष्म्यादव्यक्तभावाच्च न च क्वचन सज्जति।
सम्प्राप्य ब्राह्मण: कामं तस्मात् तद् ब्रह्म शाश्वतम्॥ ६॥
अनुवाद
आत्मा अपनी इच्छा से उस शरीर में प्रवेश करके सूक्ष्म और अव्यक्त होने के कारण किसी भी वस्तु में आसक्त नहीं होती; क्योंकि वास्तव में वह सनातन परब्रह्म है॥6॥
The soul, having entered that body according to its will, is not attached to anything due to being subtle and unmanifest; because in reality it is the eternal Supreme Being.॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥