Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.18.4: काम और क्रोध से घिरा हुआ मनुष्य किस प्रकार कर्म के जाल में बँधा हुआ गर्भ में प्रवेश करता है, इसका उत्तर सुनो॥4॥   |   mahabharat अध्याय 14.18: जीवके गर्भ-प्रवेश,आचार-धर्म, कर्म-फलकी अनिवार्यता तथा संसारसे तरनेके उपायका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 18: जीवके गर्भ-प्रवेश,आचार-धर्म, कर्म-फलकी अनिवार्यता तथा संसारसे तरनेके उपायका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  14.18.4 
यथा कर्मसमाविष्ट: काममन्युसमावृत:।
नरो गर्भं प्रविशति तच्चापि शृणु चोत्तरम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
काम और क्रोध से घिरा हुआ मनुष्य किस प्रकार कर्म के जाल में बँधा हुआ गर्भ में प्रवेश करता है, इसका उत्तर सुनो॥4॥
 
Listen to the answer to how a man surrounded by lust and anger enters the womb, bound in the web of karma. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)