Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.18.26: उन्होंने प्रधान नामक तत्त्व की रचना की, जो देहधारी जीवों का स्वभाव कहा जाता है। जो इस सम्पूर्ण जगत् में व्याप्त है और जो जगत् में मूल प्रकृति के नाम से जानी जाती है। 26॥   |   mahabharat अध्याय 14.18: जीवके गर्भ-प्रवेश,आचार-धर्म, कर्म-फलकी अनिवार्यता तथा संसारसे तरनेके उपायका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 18: जीवके गर्भ-प्रवेश,आचार-धर्म, कर्म-फलकी अनिवार्यता तथा संसारसे तरनेके उपायका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  14.18.26 
तत: प्रधानमसृजत् प्रकृतिं स शरीरिणाम्।
यया सर्वमिदं व्याप्तं यां लोके परमां विदु:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने प्रधान नामक तत्त्व की रचना की, जो देहधारी जीवों का स्वभाव कहा जाता है। जो इस सम्पूर्ण जगत् में व्याप्त है और जो जगत् में मूल प्रकृति के नाम से जानी जाती है। 26॥
 
He created the element called Pradhan, which is called the nature of embodied living beings. Which has pervaded this entire world and which is known as the original nature in the world. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)