Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.18.23: इस प्रकार जीवात्मा सदैव अपने पूर्वजन्मों के कर्मों का फल भोगता है। यद्यपि जीवात्मा अपरिवर्तनशील ब्रह्म है, फिर भी वह विकृत होकर इस संसार में जन्म लेता है, और इसका कारण कर्म ही है॥ 23॥ | mahabharat अध्याय 14.18: जीवके गर्भ-प्रवेश,आचार-धर्म, कर्म-फलकी अनिवार्यता तथा संसारसे तरनेके उपायका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस प्रकार जीवात्मा सदैव अपने पूर्वजन्मों के कर्मों का फल भोगता है। यद्यपि जीवात्मा अपरिवर्तनशील ब्रह्म है, फिर भी वह विकृत होकर इस संसार में जन्म लेता है, और इसका कारण कर्म ही है॥ 23॥
In this way, the soul always reaps the fruits of its deeds done in its previous births. Even though the soul is the unchangeable Brahma, it gets distorted and takes birth in this world, and the reason for this is karma.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥