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तेषु तत् कर्म निक्षिप्तं य: स धर्म: सनातन:।
यस्तं समभिपद्येत न स दुर्गतिमाप्नुयात्॥ २०॥
अनुवाद
उपर्युक्त दान आदि कर्म उनमें स्थित हैं। उन्हीं कर्मों को सनातन धर्म कहते हैं। जो उस सनातन धर्म का आश्रय लेता है, उसे कभी भी दुर्भाग्य नहीं भोगना पड़ता।
The above-mentioned acts of charity etc. are situated in them. Those very acts are known as Sanatan Dharma. One who takes shelter of that Sanatan Dharma never has to suffer misfortune.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥