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mahabharat 14.18.19: इस प्रकार का धार्मिक आचरण सत्पुरुषों में सदैव देखा जाता है। उनमें धर्म अटल रहता है। सत्आचरण ही धर्म का परिचय है। शान्तचित्त वाला महापुरुष सत्आचरण में स्थित रहता है॥19॥   |   mahabharat अध्याय 14.18: जीवके गर्भ-प्रवेश,आचार-धर्म, कर्म-फलकी अनिवार्यता तथा संसारसे तरनेके उपायका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 18: जीवके गर्भ-प्रवेश,आचार-धर्म, कर्म-फलकी अनिवार्यता तथा संसारसे तरनेके उपायका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  14.18.19 
एवं सत्सु सदा पश्येत् तत्राप्येषा ध्रुवा स्थिति:।
आचारो धर्ममाचष्टे यस्मिन् शान्ता व्यवस्थिता:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार का धार्मिक आचरण सत्पुरुषों में सदैव देखा जाता है। उनमें धर्म अटल रहता है। सत्आचरण ही धर्म का परिचय है। शान्तचित्त वाला महापुरुष सत्आचरण में स्थित रहता है॥19॥
 
This type of religious conduct is always seen in good men. Religion is unshakable in them. Good conduct is the introduction of religion. A great man with a calm mind remains established in good conduct.॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)