श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 18: जीवके गर्भ-प्रवेश,आचार-धर्म, कर्म-फलकी अनिवार्यता तथा संसारसे तरनेके उपायका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  14.18.11 
यथा च दीप: शरणे दीप्यमान: प्रकाशते।
एवमेव शरीराणि प्रकाशयति चेतना॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जैसे जलता हुआ दीपक सारे घर में प्रकाश फैलाता है, वैसे ही जीव की चेतन शक्ति शरीर के सब अंगों को प्रकाशित करती है ॥11॥
 
Just as a burning lamp spreads light throughout a house, similarly the conscious power of a living being illuminates all the parts of the body. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)