Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.17.29: तब आत्मा बार-बार लम्बी और भयंकर साँसें छोड़ती हुई बाहर निकलने लगती है। उस समय वह अचानक इस जड़ शरीर को कँपा देती है। 29।   |   mahabharat अध्याय 14.17: काश्यपके प्रश्नोंके उत्तरमें सिद्ध महात्माद्वारा जीवकी विविध गतियोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 17: काश्यपके प्रश्नोंके उत्तरमें सिद्ध महात्माद्वारा जीवकी विविध गतियोंका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  14.17.29 
तत: स तं महोच्छ्वासं भृशमुच्छ्वस्य दारुणम्।
निष्क्रामन् कम्पयत्याशु तच्छरीरमचेतनम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
तब आत्मा बार-बार लम्बी और भयंकर साँसें छोड़ती हुई बाहर निकलने लगती है। उस समय वह अचानक इस जड़ शरीर को कँपा देती है। 29।
 
Then the soul starts coming out by repeatedly exhaling long and fearful breaths. At that time it suddenly makes this inert body tremble. 29.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)