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mahabharat 14.16.36: मैंने अनेक बार घोर अपमान, मृत्युदंड और कठोर कारावास सहे हैं। मुझे नरक में गिरना पड़ा है और यमलोक की यातनाएँ सहनी पड़ी हैं॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 14.16: अर्जुनका श्रीकृष्णसे गीताका विषय पूछना और श्रीकृष्णका अर्जुनसे सिद्ध, महर्षि एवं काश्यपका संवाद सुनाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.16.36 
प्राप्ता विमाननाश्चोग्रा वधबन्धाश्च दारुणा:।
पतनं निरये चैव यातनाश्च यमक्षये॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
मैंने अनेक बार घोर अपमान, मृत्युदंड और कठोर कारावास सहे हैं। मुझे नरक में गिरना पड़ा है और यमलोक की यातनाएँ सहनी पड़ी हैं॥ 36॥
 
I have many times suffered severe humiliation, death sentences and severe imprisonment. I have had to fall into hell and endure the tortures of Yamaloka.॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)