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mahabharat 14.16.31: काम और क्रोध के वशीभूत होकर तथा काम के वशीभूत होकर मैंने अनेक पाप किए हैं और उनके फलस्वरूप मुझे महान दुःख देने वाले अशुभ प्रसंगों का सामना करना पड़ा है ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 14.16: अर्जुनका श्रीकृष्णसे गीताका विषय पूछना और श्रीकृष्णका अर्जुनसे सिद्ध, महर्षि एवं काश्यपका संवाद सुनाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.16.31 
अशुभा गतय: प्राप्ता: कष्टा मे पापसेवनात्।
काममन्युपरीतेन तृष्णया मोहितेन च॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
काम और क्रोध के वशीभूत होकर तथा काम के वशीभूत होकर मैंने अनेक पाप किए हैं और उनके फलस्वरूप मुझे महान दुःख देने वाले अशुभ प्रसंगों का सामना करना पड़ा है ॥31॥
 
I have committed many sins under the influence of lust and anger and being tempted by desire, and as a result of their occurrence, I have suffered inauspicious events which caused great suffering. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)