Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.16.25-27: उस ज्ञानी, तपस्वी, धर्मज्ञ और एकाग्रचित्त महर्षि ने पास जाकर नियमानुसार उन सिद्ध महात्मा के चरणों में प्रणाम किया । वे ब्राह्मणों में श्रेष्ठ और बड़े ही अद्भुत महात्मा थे । उनमें सब प्रकार की योग्यताएँ थीं । वे शास्त्रों के ज्ञाता और उत्तम चरित्र के थे । उन्हें देखकर कश्यपजी को बड़ा आश्चर्य हुआ । वे उन्हें गुरु मानकर उनकी सेवा करने लगे और अपनी सेवा, भक्ति और श्रद्धा से उन्होंने उन सिद्ध महात्मा को संतुष्ट कर दिया ॥25-27॥ | mahabharat अध्याय 14.16: अर्जुनका श्रीकृष्णसे गीताका विषय पूछना और श्रीकृष्णका अर्जुनसे सिद्ध, महर्षि एवं काश्यपका संवाद सुनाना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस ज्ञानी, तपस्वी, धर्मज्ञ और एकाग्रचित्त महर्षि ने पास जाकर नियमानुसार उन सिद्ध महात्मा के चरणों में प्रणाम किया । वे ब्राह्मणों में श्रेष्ठ और बड़े ही अद्भुत महात्मा थे । उनमें सब प्रकार की योग्यताएँ थीं । वे शास्त्रों के ज्ञाता और उत्तम चरित्र के थे । उन्हें देखकर कश्यपजी को बड़ा आश्चर्य हुआ । वे उन्हें गुरु मानकर उनकी सेवा करने लगे और अपनी सेवा, भक्ति और श्रद्धा से उन्होंने उन सिद्ध महात्मा को संतुष्ट कर दिया ॥25-27॥
Going near that wise, ascetic, religious aspirant and concentrated Maharshi bowed down at the feet of that perfect Mahatma as per the rules. He was the best among the Brahmins and a very wonderful saint. He had all kinds of abilities. He was a knower of scriptures and had a good character. Kashyap was very surprised to see him. He started serving him considering him as his Guru and by his service, devotion and reverence he satisfied that perfect Mahatma.॥25-27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥