Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.16.15-16: हे शत्रुओं का नाश करने वाले! एक समय ब्रह्मलोक से एक भयंकर ब्राह्मण मेरे पास आया। मैंने विधिपूर्वक उसकी पूजा की और उससे मोक्ष प्राप्ति का मार्ग पूछा। हे भरतश्रेष्ठ! उसने मेरे प्रश्न का सुन्दर उत्तर दिया। पार्थ! मैं तुमसे यही कह रहा हूँ। इसे बिना किसी अन्य विचार के ध्यानपूर्वक सुनो। 15-16।   |   mahabharat अध्याय 14.16: अर्जुनका श्रीकृष्णसे गीताका विषय पूछना और श्रीकृष्णका अर्जुनसे सिद्ध, महर्षि एवं काश्यपका संवाद सुनाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 16: अर्जुनका श्रीकृष्णसे गीताका विषय पूछना और श्रीकृष्णका अर्जुनसे सिद्ध, महर्षि एवं काश्यपका संवाद सुनाना  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  14.16.15-16 
आगच्छद् ब्राह्मण: कश्चित् स्वर्गलोकाद र िंदम।
ब्रह्मलोकाच्च दुर्धर्ष: सोऽस्माभि: पूजितोऽभवत्॥ १५॥
अस्माभि: परिपृष्टश्च यदाह भरतर्षभ।
दिव्येन विधिना पार्थ तच्छृणुष्वाविचारयन्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं का नाश करने वाले! एक समय ब्रह्मलोक से एक भयंकर ब्राह्मण मेरे पास आया। मैंने विधिपूर्वक उसकी पूजा की और उससे मोक्ष प्राप्ति का मार्ग पूछा। हे भरतश्रेष्ठ! उसने मेरे प्रश्न का सुन्दर उत्तर दिया। पार्थ! मैं तुमसे यही कह रहा हूँ। इसे बिना किसी अन्य विचार के ध्यानपूर्वक सुनो। 15-16।
 
O destroyer of enemies! Once, a fierce Brahmin came to me from Brahmaloka and was in heaven. I worshipped him according to the rituals and asked him about the path to salvation. O best of the Bharatas! He answered my question in a beautiful way. Parth! That is what I am telling you. Listen to this carefully without thinking otherwise. 15-16.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)