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स हि धर्म: सुपर्याप्तो ब्रह्मण: पदवेदने।
न शक्यं तन्मया भूयस्तथा वक्तुमशेषत:॥ १२॥
अनुवाद
क्योंकि वह धर्म ब्रह्मपद प्राप्त कराने के लिए पर्याप्त था, अतः अब सम्पूर्ण धर्म को उसी रूप में पुनः दोहराना मेरी शक्ति से बाहर है ॥12॥
Because that Dharma was sufficient to enable one to attain the state of Brahman, it is now beyond my power to repeat the entire Dharma in the same form again. ॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥