Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.16.11: हे पाण्डुपुत्र! तुम निश्चय ही बड़े श्रद्धाहीन हो, तुम्हारी बुद्धि बड़ी मंद प्रतीत होती है। धनंजय! अब मैं उस उपदेश को ज्यों का त्यों नहीं दोहरा सकता।॥11॥ | mahabharat अध्याय 14.16: अर्जुनका श्रीकृष्णसे गीताका विषय पूछना और श्रीकृष्णका अर्जुनसे सिद्ध, महर्षि एवं काश्यपका संवाद सुनाना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नूनमश्रद्दधानोऽसि दुर्मेधा ह्यसि पाण्डव।
न च शक्यं पुनर्वक्तुमशेषेण धनंजय॥ ११॥
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र! तुम निश्चय ही बड़े श्रद्धाहीन हो, तुम्हारी बुद्धि बड़ी मंद प्रतीत होती है। धनंजय! अब मैं उस उपदेश को ज्यों का त्यों नहीं दोहरा सकता।॥11॥
O son of Pandu! You are certainly very faithless, your intellect seems to be very dull. Dhananjay! Now I cannot repeat that advice as it is. ॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥