श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 15: भगवान‍् श्रीकृष्णका अर्जुनसे द्वारका जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  14.15.5 
इन्द्रप्रस्थे महात्मानौ रेमतु: कृष्णपाण्डवौ।
प्रविश्य तां सभां रम्यां विजह्राते च भारत॥ ५॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! इन्द्रप्रस्थ लौटकर महात्मा श्रीकृष्ण और अर्जुन माया द्वारा निर्मित सुन्दर सभा में प्रवेश करके आनन्दपूर्वक भोग करने लगे॥5॥
 
Bharatanandan! Returning to Indraprastha, Mahatma Shri Krishna and Arjun entered the beautiful assembly built by Maya and started enjoying themselves joyfully. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)