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mahabharat 14.15.4: वे दोनों तीर्थस्थानों, छोटे-छोटे तालाबों और नदियों के तटों पर विचरण करते हुए ऐसे प्रसन्न हो रहे थे, जैसे नन्दन वन में विचरण करते हुए अश्विनीकुमार प्रसन्न होते हैं॥4॥   |   mahabharat अध्याय 14.15: भगवान‍् श्रीकृष्णका अर्जुनसे द्वारका जानेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 15: भगवान‍् श्रीकृष्णका अर्जुनसे द्वारका जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  14.15.4 
तीर्थेषु चैव पुण्येषु पल्वलेषु नदीषु च।
चङ्क्रम्यमाणौ संहृष्टावश्विनाविव नन्दने॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों तीर्थस्थानों, छोटे-छोटे तालाबों और नदियों के तटों पर विचरण करते हुए ऐसे प्रसन्न हो रहे थे, जैसे नन्दन वन में विचरण करते हुए अश्विनीकुमार प्रसन्न होते हैं॥4॥
 
Wandering around the holy places of pilgrimage, small ponds and the banks of rivers, they both felt as happy as the Ashwini Kumars roaming in Nandana forest. ॥4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)