Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.15.34: राजकुमार! अब यहाँ आपके साथ समय बिताने के अतिरिक्त मेरे रहने का और कोई प्रयोजन नहीं है। पार्थ! यह सम्पूर्ण पृथ्वी पूर्णतः आपके और धर्मात्मा गुरु युधिष्ठिर के अधीन है। | mahabharat अध्याय 14.15: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनसे द्वारका जानेका प्रस्ताव करना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रयोजनं चापि निवासकारणे
न विद्यते मे त्वदृते नृपात्मज।
स्थिता हि पृथ्वी तव पार्थ शासने
गुरो: सुवृत्तस्य युधिष्ठिरस्य च॥ ३४॥
अनुवाद
राजकुमार! अब यहाँ आपके साथ समय बिताने के अतिरिक्त मेरे रहने का और कोई प्रयोजन नहीं है। पार्थ! यह सम्पूर्ण पृथ्वी पूर्णतः आपके और धर्मात्मा गुरु युधिष्ठिर के अधीन है।
Prince! Now there is no other purpose of my stay here except to enjoy my time with you. Partha! This entire earth is completely under the rule of you and the virtuous Guru Yudhishthira. 34.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥