Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.15.33: पार्थ! मेरे घर में जो भी धन-संपत्ति है, तथा मेरा यह शरीर भी, सब धर्मराज युधिष्ठिर की सेवा में ही समर्पित है। परम बुद्धिमान कुरुराज युधिष्ठिर मुझे सदैव प्रिय और आदरणीय हैं॥ 33॥ | mahabharat अध्याय 14.15: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनसे द्वारका जानेका प्रस्ताव करना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इदं शरीरं वसु यच्च मे गृहे
निवेदितं पार्थ सदा युधिष्ठिरे।
प्रियश्च मान्यश्च हि मे युधिष्ठिर:
सदा कुरूणामधिपो महामति:॥ ३३॥
अनुवाद
पार्थ! मेरे घर में जो भी धन-संपत्ति है, तथा मेरा यह शरीर भी, सब धर्मराज युधिष्ठिर की सेवा में ही समर्पित है। परम बुद्धिमान कुरुराज युधिष्ठिर मुझे सदैव प्रिय और आदरणीय हैं॥ 33॥
Partha! Whatever wealth and property I have in my house, and this body of mine, are always dedicated to the service of Dharmaraja Yudhishthira. The most intelligent Kuru King Yudhishthira is always dear and respected to me.॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥