श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 15: भगवान‍् श्रीकृष्णका अर्जुनसे द्वारका जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  14.15.32 
तं मया सह गत्वाद्य राजानं कुरु वर्धनम्।
आपृच्छ कुरुशार्दूल गमनं द्वारकां प्रति॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! अब तुम मेरे साथ चलकर राजा को बधाई दो और उनसे मुझे द्वारका जाने की अनुमति मांगो।
 
Best of the Kurus! Now you come with me to congratulate the king and ask him for his permission to let me go to Dwaraka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)