Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.15.27: हे कुरुणापुत्र! हे कुन्तीपुत्र! मैं तुमसे सत्य कहता हूँ। मैंने जो कुछ किया या कहा है, वह सब तुम्हारी प्रसन्नता और तुम्हारे हित के लिए किया है। यह किसी भी प्रकार मिथ्या नहीं है॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 14.15: भगवान‍् श्रीकृष्णका अर्जुनसे द्वारका जानेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 15: भगवान‍् श्रीकृष्णका अर्जुनसे द्वारका जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  14.15.27 
सर्वं त्विदमहं पार्थ त्वत्प्रीतिहितकाम्यया।
ब्रवीमि सत्यं कौरव्य न मिथ्यैतत् कथंचन॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुणापुत्र! हे कुन्तीपुत्र! मैं तुमसे सत्य कहता हूँ। मैंने जो कुछ किया या कहा है, वह सब तुम्हारी प्रसन्नता और तुम्हारे हित के लिए किया है। यह किसी भी प्रकार मिथ्या नहीं है॥ 27॥
 
O son of Kuruṇā! O son of Kunti! I am telling you the truth. Whatever I have done or said, I have done it for your happiness and for your benefit. This is not false in any way.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)